मैं इंतज़ार करूँगा
Hindi Poem by Pranav Kirti
मैं अब तुम्हें मिलूंगा नहीं,
यह हक़ीक़त उम्र भर मुझे दरख़्तों में छिपे दीमक की तरह खायेगी
मैं आह भी नहीं करूँगा
मैं कुछ कहूंगा ही नहीं। जैसे पुरानी हवेलियों में दीवारों पर तराशे बुत हुआ करते हैं।
यह बात तय है कि तुम और मैं, दोनों समय की धारा में एक दिन बह जायेंगे
तुम और मैं दोनों एक दिन चिता पर बिछ जायेंगे
यह बात तय है कि मैं आख़री सांस लेने के बाद भी तुम्हारा इंतज़ार करूँगा।
तुम कुछ देर को ही सही पर आना,
कुछ कहना नहीं, बस दूर खड़े हो जाना,
जब चिता की आग ठंडी हो जाएगी और सब लोग चले जायेंगे तो थोड़ी राख़ बटोर कर घर लेते जाना।
मैं इंतज़ार करूँगा, जैसे विस्फोट में किसी इमारत के ढह जाने के बाद मलबे में दबा थोड़ा बारूद, थोड़ा धुआँ, थोड़े सपने, कुछ बुरादा, और एक कटा हुआ हाथ अपने रहनुमा का करता होगा।
तुम घबराना नहीं। मैं ठीक हूँ। मैं कवि भी हूँ न, तो यह सब लिख लेता हूँ।
लिखते वक़्त जी लेता हूँ,.. वो सारे जन्म जन्मांतर के वायदे, कसमें, कभी न छोड़ने वाले हाथ पर भी नज़र जाती है मेरी, उसे ख़यालों में पकड़ कर रो लेता हूँ। तुम्हारी गदेलियों से पसीना अब भी बहता होगा।
आजसे तुम दुनिया-दुनिया खेलना, महल-महल करना,
इश्क़ मैं कर लूंगा।
आज से तुम दौलत-दौलत करना, ख़रीद-फ़रोख़्त करना,
इश्क़ मैं कर लूंगा।
आज से तुम गिनना हर एक पल, घड़ी, मौसम, साल
हर एक गुज़रते लम्हे में, हर निकलती सांस में
इश्क़ मैं कर लूंगा।
आज से तुम इंतज़ार करना, और उस रोज़ आना,
कुछ कहना नहीं, बस दूर खड़े हो जाना,
मैं धड़कनें रोक लूंगा कुछ पलों को, सब कहेंगे आदमी था, अब नहीं रहा,
उन चंद लम्हों में देखना और मेरी बुझती रौशनी, डूबते ख़्वाबों, हारी उम्मीद और बिछड़ती ज़िन्दगी को
जी भर कर अपनी आँखों में तैरने देना।
मैं कुछ कहूंगा नहीं, सब डर जायेंगे।
तुम कुछ कहना नहीं, मैं उठ बैठूंगा।
मैं अब तुम्हें मिलूँगा नहीं, मैं बस इंतज़ार करूंगा।
-मिस्रा